मिडिल ईस्ट तनाव के बीच LPG सप्लाई सुरक्षित रखने की तैयारी, सरकार ने उत्पादन 10% बढ़ाया

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट की आशंकाओं के बीच Narendra Modi की अध्यक्षता में 10 मार्च को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में सरकार ने देश में एलपीजी और ईंधन की उपलब्धता को लेकर अहम रणनीति पर चर्चा की और उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि मौजूदा वैश्विक हालात के बीच जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बताया जाए कि देश में तेल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं और भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही यह भी जानकारी दी जाए कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए मजबूत सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश के घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी न हो। खासतौर पर घरेलू और कमर्शियल Liquefied Petroleum Gas (LPG) की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है।
रेस्टोरेंट और होटल उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनसे सीधे संवाद करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई है, जो देशभर में ईंधन की आपूर्ति की निगरानी कर रही है। इसके अलावा भारत ने न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि आयात के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों का भी इस्तेमाल शुरू किया है, ताकि सप्लाई बाधित न हो।
हाल के दिनों में कई जगह एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारों की खबरें सामने आई हैं। इस पर सूत्रों का कहना है कि इसकी वजह वास्तविक कमी नहीं, बल्कि अचानक बढ़ी बुकिंग है। पहले जहां लोग एक से डेढ़ महीने में सिलेंडर बुक करते थे, वहीं अब कई लोग 15 से 20 दिन के भीतर ही दोबारा बुकिंग कराने लगे हैं, जिससे कुछ स्थानों पर भीड़ देखने को मिली।
सरकारी दावे के अनुसार, पिछले दो दिनों में देश में एलपीजी उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। फिलहाल बुकिंग और डिलीवरी के बीच औसतन ढाई दिन का समय लग रहा है। हालांकि नई बुकिंग 25 दिनों के बाद ही की जा सकेगी।
मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए सरकार ने कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के लिए नए वैकल्पिक स्रोत भी तलाश लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों के कारण भारत इस वैश्विक संकट से अन्य कई देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में निकल सकता है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की किसी प्रकार की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि कहीं समस्या सामने आती है तो वह केवल स्थानीय सप्लाई चेन से जुड़ी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, देश में पहले की तरह ही हर दिन लगभग 60 लाख गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में स्थिति चुनौतीपूर्ण भी होती है, तो भी घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
