भारतीय युद्धपोतों को मिलेगी नई स्टेल्थ ताकत, यूनिकॉर्न सिस्टम के संयुक्त निर्माण पर भारत-जापान की सहमति

भारत और जापान ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए पहली बार संयुक्त रूप से आधुनिक नौसैनिक संचार प्रणाली यूनिकॉर्न (Unified Complex Radio Antenna / NORA-50 Integration Mast) विकसित करने का फैसला किया है। इस परियोजना के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए उन्नत रेडियो एंटीना सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे उनकी स्टेल्थ क्षमता और समुद्री सुरक्षा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह परियोजना दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सहयोग से समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

यूनिकॉर्न सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि युद्धपोतों पर लगे विभिन्न संचार और नेविगेशन एंटीना को एक विशेष कम-रडार सिग्नेचर वाले रेडोम में एकीकृत किया जाता है। इससे जहाज का रडार सिग्नेचर घटता है और विरोधी देशों के लिए उसकी पहचान और निगरानी करना अधिक कठिन हो जाता है।

इस आधुनिक प्रणाली में टैक्टिकल डेटा लिंक, TACAN, संचार प्रणाली, आईडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फो (IFF) और इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) जैसी कई उन्नत तकनीकों का समावेश होगा। इन सभी को एकीकृत कर युद्धपोतों की परिचालन क्षमता और सुरक्षा को बेहतर बनाया जाएगा।

यूनिकॉर्न तकनीक का विकास जापान की प्रमुख कंपनियों—एनईसी कॉर्पोरेशन, सांपा कोग्यो के.के. और द योकोहामा रबर कंपनी लिमिटेड—ने किया है। वर्तमान में यह प्रणाली जापान की मोगामी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट पर इस्तेमाल की जा रही है।

भारत में इस परियोजना के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) सिस्टम के निर्माण और एकीकरण का कार्य करेगी, जबकि जापान तकनीकी विशेषज्ञता और डिजाइन उपलब्ध कराएगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से स्टेल्थ क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे समुद्री अभियानों के दौरान भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही भारत-जापान रक्षा सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन को समर्थन मिलेगा।

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