सदन की स्वतंत्रता पर उठे सवाल, ओवैसी ने कांग्रेस और स्पीकर पर जताया विरोध

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में बुधवार को स्पीकर और सदन की कार्यवाही को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद की आज़ादी धीरे-धीरे कमजोर हो रही है और विपक्ष की एकता के नाम पर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।

ओवैसी ने बताया कि कल वे चंद्रशेखर और पप्पू यादव के साथ एक मोशन पेश करेंगे, जिसमें हनुमान बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तो AIMIM से कोई राय नहीं ली गई।

ओवैसी ने सदन की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि स्पीकर का पद देश में उच्चतम मुकाम का है और वह संविधान के अनुसार पूरे सदन के लिए जवाबदेह हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी के मजदूर नहीं हैं और सरकार और स्पीकर दोनों उनके प्रति जवाबदेह हैं।

विपक्ष की एकता पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि विपक्ष एकता के नाम पर AIMIM को नजरअंदाज कर रहा है, लेकिन वे “गुलाम नहीं बनेंगे।” उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव का उदाहरण भी दिया और कहा कि उस समय भी AIMIM से कोई राय नहीं ली गई।

ओवैसी ने शायरी के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष को भी घेरा और सदन में पक्ष और विपक्ष की कार्यवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही पक्ष और विपक्ष की इच्छानुसार नहीं चल रही।

इससे पहले, ओवैसी ने मंगलवार को सदन में पाइंट ऑफ ऑर्डर उठाया और बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की अध्यक्षता की वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने संविधान के आर्टिकल 95 और 96 का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई ऑफिस खाली हो या हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो केवल सही प्रक्रिया के अनुसार ही बैठक की अध्यक्षता हो सकती है। उन्होंने सरकार पर संवैधानिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया।

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