पुलिस महकमे में कार्रवाई से शाहजहांपुर में हलचल, 9 दरोगा लाइन हाजिर और 5 जांच के दायरे में

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने के मामले में पुलिस विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा के बाद 14 उप निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 9 दरोगाओं को लाइन हाजिर किया गया है, जबकि 5 के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कराई गई है।
यह कार्रवाई शिकायतों की जांच और उनके निस्तारण में अनियमितताएं सामने आने के बाद की गई। समीक्षा के दौरान कुछ मामलों में शिकायतों का उचित समाधान किए बिना ही निस्तारण रिपोर्ट अपलोड किए जाने की बात सामने आई।
आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा में खुली लापरवाही
आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए आईजीआरएस पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। जब थाने या संबंधित विभाग में शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाता, तो फरियादी इस पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इन शिकायतों के निस्तारण की निगरानी शासन स्तर पर की जाती है। अधिकारियों की ओर से समय-समय पर शिकायतों की स्थिति और उनके समाधान से संबंधित रिपोर्ट की समीक्षा भी की जाती है।
शाहजहांपुर में मंगलवार को हुई समीक्षा के दौरान 14 दरोगाओं की कार्यप्रणाली में खामियां सामने आईं। बताया गया कि कुछ मामलों में शिकायतों का वास्तविक निस्तारण किए बिना ही रिपोर्ट अपलोड कर दी गई थी। वहीं, कुछ शिकायतों में लापरवाही के कारण फरियादियों को समाधान के लिए इंतजार करना पड़ा।
9 दरोगा लाइन हाजिर, 5 के खिलाफ जांच
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने संबंधित उप निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की। बुधवार रात जारी कार्रवाई के तहत 9 दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया गया, जबकि 5 अन्य के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कराई गई है।
लाइन हाजिर किए जाने का अर्थ संबंधित पुलिसकर्मी को फिलहाल नियमित तैनाती से हटाकर पुलिस लाइन में संबद्ध करना है। वहीं, विभागीय जांच के जरिए संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ सामने आई शिकायतों की पड़ताल की जाएगी।
जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फरियादियों की शिकायतों के निस्तारण पर रहेगा जोर
इस कार्रवाई के बाद आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण को लेकर पुलिस विभाग की जवाबदेही और बढ़ने की उम्मीद है। शिकायतों की जांच किए बिना या वास्तविक स्थिति का सत्यापन किए बगैर निस्तारण रिपोर्ट दर्ज करना गंभीर लापरवाही माना जा सकता है।
अब शिकायतों पर की गई कार्रवाई और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही रिपोर्ट अपलोड करने पर जोर रहेगा। इससे शिकायतकर्ताओं को समय पर समाधान मिलने और निस्तारण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
फिलहाल, पांच दरोगाओं के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही उनके संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।
