ललितपुर पहुंचे सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज, शिक्षा में आध्यात्मिकता और संस्कार आधारित मॉडल की वकालत

ललितपुर में रविवार को संक्षिप्त प्रवास के दौरान आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रीय विकास जैसे विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। हाईवे स्थित चंदेरा तिराहे पर उनके अनुयायियों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली का मुख्य फोकस रोजगार और आर्थिक सफलता पर केंद्रित हो गया है, जबकि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तित्व विकास, नैतिकता और चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। उनका सुझाव था कि शिक्षा में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों को शामिल कर एक संतुलित मॉडल अपनाया जाए, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज का मानना है कि यदि बच्चों को बचपन से नैतिक शिक्षा और संस्कार दिए जाएं तो नशे की प्रवृत्ति, भ्रष्टाचार और हिंसा जैसी सामाजिक चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था देश को मजबूत और जिम्मेदार नागरिक देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता है, जो ज्ञान के साथ-साथ मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी समान रूप से बल दे। उन्होंने तकनीकी प्रगति और कृषि विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के साथ अनुशासन और पारदर्शिता भी जरूरी है।
सरकार द्वारा शिक्षा और पारंपरिक भारतीय मूल्यों से जुड़े सुधारों के प्रयासों पर उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। साथ ही उन्होंने कहा कि विभिन्न व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य देश को अधिक सक्षम और व्यवस्थित बनाना है।
हाल के छात्र आंदोलनों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि छात्रों को परीक्षा या पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर शिकायत है तो उनकी बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन का उपयोग देश में अस्थिरता फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
हिंदू राष्ट्र से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है। उनके अनुसार, आदर्श शासन व्यवस्था वह है जो न्याय, नैतिकता और वैदिक मूल्यों पर आधारित हो तथा समाज के सभी वर्गों के हित में कार्य करे।
धार्मिक आयोजनों में भगवान हनुमान की झांकियों और प्रतीकों के उपयोग पर उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और प्रतीकों का सम्मान बनाए रखना आवश्यक है तथा उनका प्रदर्शन गरिमा और मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अनुयायी और स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे।
