नोएडा में पजल पार्किंग के चार प्रोजेक्ट, योजना सहित सभी विवरण केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी

Noida में बढ़ती पार्किंग समस्या से राहत दिलाने के लिए प्राधिकरण ने नई पहल शुरू की है। शहर में सरफेस पार्किंग के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बन रही है। इसे देखते हुए अब पजल पार्किंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।
चार स्थानों पर प्रस्तावित इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना—जिसमें लागत अनुमान, निर्माण एजेंसी, स्थान और पार्किंग क्षमता शामिल होगी—अक्टूबर तक केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। यह निर्माण एनकेप फंड के तहत कराया जाएगा।
किन सेक्टरों में बनेगी पजल पार्किंग?
पहली पजल पार्किंग सेक्टर-63 में, दूसरी सेक्टर-124 में बनाई जाएगी। इसके अलावा दो अन्य स्थानों का भी चयन किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पार्किंग दबाव को कम करना है।
कैसे काम करेगी ऑटोमेटेड पजल पार्किंग?
यह सिस्टम पारंपरिक हाइड्रोलिक पार्किंग से अलग होगा। पजल पार्किंग एक गेम की तरह काम करती है, जिसमें कई स्लॉट्स ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं मूव होते हैं।
एक कार को पार्क करने में केवल 3 से 6 मिनट लगेंगे।
पारंपरिक मल्टीलेवल पार्किंग में जहां 15-20 मिनट लगते हैं, वहां यह सिस्टम समय बचाएगा।
चार से छह मंजिला संरचना में हर फ्लोर पर करीब 25 कारें खड़ी की जा सकेंगी।
कम जगह में अधिक क्षमता
इस तकनीक की खासियत है कि इसे कम जगह में भी स्थापित किया जा सकता है। सीमित भूखंड पर पांच से छह मंजिला ढांचा तैयार किया जा सकता है।
पूरा सिस्टम सेंसर आधारित होगा, जिससे चोरी और क्षति की आशंका कम रहेगी। संचालन के लिए कम मैनपावर की जरूरत होगी। संचालन उसी कंपनी को सौंपने की योजना है, जिसे इस तकनीक का पूर्व अनुभव हो।
सुरक्षा के लिए सेंसर तकनीक
पार्किंग में सुरक्षा के लिए उन्नत सेंसर लगाए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति, बच्चा या जानवर गलती से पार्किंग क्षेत्र में प्रवेश कर जाए, तो सिस्टम तुरंत रुक जाएगा। पीली लाइन के भीतर गतिविधि होने पर वाहन की मूवमेंट स्वतः स्थिर हो जाएगी, जिससे दुर्घटना की आशंका नहीं रहेगी।
यह परियोजना लागू होने के बाद नोएडा में ट्रैफिक प्रबंधन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
