1962 युद्ध से लेकर 2013 तक, कई बार सरकारों ने रोकी सोने की खरीदारी की रफ्तार

Narendra Modi द्वारा हाल ही में लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील के बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। भारत में आर्थिक दबाव, विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे जैसी चुनौतियों के दौरान अलग-अलग सरकारें पहले भी जनता से सोने की खरीद कम करने की अपील करती रही हैं।

पीएम मोदी की हालिया अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अगले एक साल तक जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ईंधन की बचत, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा और गैर-जरूरी खर्चों में कमी जरूरी है।

उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और कार पूलिंग जैसे उपायों पर भी जोर दिया।

2013 में पी. चिदंबरम ने भी की थी अपील

साल 2013 में यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री P. Chidambaram ने भी देशवासियों से सोना कम खरीदने की अपील की थी।

उस समय भारत का चालू खाता घाटा तेजी से बढ़ रहा था और रुपये पर दबाव बढ़ गया था। सरकार का मानना था कि भारी मात्रा में सोने के आयात से विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो रहा है।

चिदंबरम ने कहा था कि भारत में सोना पैदा नहीं होता और हर खरीद के लिए डॉलर खर्च करना पड़ता है। इसी कारण सरकार ने उस दौर में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक कर दिया था।

1962 युद्ध के बाद लागू हुए सख्त नियम

Sino-Indian War के बाद भारत गंभीर आर्थिक दबाव में आ गया था। विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और सोने की खपत कम करने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री Morarji Desai ने गोल्ड कंट्रोल नियम लागू किए।

साल 1963 में सरकार ने 14 कैरेट से ज्यादा शुद्धता वाले आभूषणों पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में 1968 में नियम और सख्त किए गए, जिनके तहत गोल्ड बार और सिक्के रखना भी अवैध घोषित कर दिया गया था।

1965 युद्ध के दौरान जनता से मांगा गया था सोना

Indo-Pakistani War of 1965 के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री Lal Bahadur Shastri ने देशवासियों से आर्थिक सहयोग की अपील की थी।

उस समय सरकार ने ‘नेशनल डिफेंस गोल्ड बॉन्ड’ जैसी योजनाएं शुरू की थीं, ताकि लोग देश की जरूरतों के लिए अपना सोना सरकार के पास जमा करा सकें।

आर्थिक संकट में क्यों बढ़ती हैं ऐसी अपीलें?

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है। चूंकि देश में सोने का उत्पादन बहुत कम होता है, इसलिए इसकी बड़ी मात्रा आयात करनी पड़ती है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से आर्थिक चुनौतियों या वैश्विक संकट के समय सरकारें अक्सर जनता से सोने की खरीद सीमित करने और बचत पर जोर देने की अपील करती रही हैं।

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