सपरार बांध के जीर्णोद्धार को मिली मंजूरी, 14 करोड़ से मजबूत होगी जल संरचना

झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र में स्थित सपरार बांध के जीर्णोद्धार का रास्ता साफ हो गया है। सिंचाई विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से बांध की विशेष मरम्मत कराई जाएगी।

योजना के तहत बांध में पानी रोकने वाले गेटों की मरम्मत के साथ उसकी मजबूती बढ़ाने के लिए स्टोन बोल्डर लगाए जाएंगे। बांध के दोनों ओर पिचिंग का काम भी प्रस्तावित है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद निर्माण और मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा।

1954 में हुआ था बांध का निर्माण

सपरार बांध करीब 71 साल पुराना है। इसका निर्माण 1954 में देश की पहली पंचवर्षीय योजना के दौरान कराया गया था। मऊरानीपुर क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से यह बांध काफी महत्वपूर्ण है।

लंबे समय से पर्याप्त मरम्मत नहीं होने के कारण बांध के निचले हिस्से में मिट्टी का कटाव होने लगा था। इसके अलावा पानी रोकने के लिए लगाए गए 38 गेट भी पुराने हो चुके हैं। कई बार गेट जाम होने की समस्या सामने आती है, जिससे उनके संचालन में परेशानी होती है।

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बांध की विशेष मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।

40 हजार एकड़ जमीन की होती है सिंचाई

सपरार बांध से मऊरानीपुर क्षेत्र के अलावा हमीरपुर जिले में भी सिंचाई की जरूरत पूरी होती है। विभागीय जानकारी के अनुसार करीब 40 हजार एकड़ भूमि को इस बांध से पानी मिलता है।

हालांकि, बारिश कम होने पर बांध में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाता। पिछले वर्ष लंबे अंतराल के बाद बांध में रिकॉर्ड स्तर पर पानी पहुंचा था। इस साल भी कम बारिश के चलते बांध पूरी क्षमता तक नहीं भर सका है।

सपरार बांध की प्रमुख जानकारी

  • जल भंडारण क्षमता: 76 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर)
  • कैचमेंट क्षेत्र: 3.9 किलोमीटर
  • बांध की ऊंचाई: 16.76 मीटर
  • पानी रोकने वाले गेट: 38

स्टोन बोल्डर और पिचिंग से बढ़ेगी मजबूती

अधिशासी अभियंता अजय कुमार भारती के अनुसार शासन की मंजूरी के बाद बांध की विशेष मरम्मत कराई जाएगी। इसके तहत कमजोर हिस्सों में स्टोन बोल्डर लगाए जाएंगे और दोनों तरफ पिचिंग का काम किया जाएगा।

इन कार्यों से बांध की संरचना को मजबूती मिलने के साथ पानी के सुरक्षित संचालन में भी मदद मिलेगी। गेटों की मरम्मत के बाद जल नियंत्रण व्यवस्था भी बेहतर होने की उम्मीद है।

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