खाने में कौन सा नमक करना चाहिए इस्तेमाल? रोजाना सेवन से पहले जानें तीनों प्रकार के नमक का अंतर

भारतीय रसोई में नमक के बिना भोजन की कल्पना करना मुश्किल है। दाल, सब्जी, सलाद और रायते से लेकर चटपटी चीजों तक, लगभग हर तरह के खाने में नमक का इस्तेमाल होता है। हालांकि, बाजार में सफेद नमक, सेंधा नमक और काला नमक जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि रोजाना इस्तेमाल के लिए इनमें से कौन-सा नमक बेहतर है और क्या प्राकृतिक नमक वास्तव में सफेद नमक से ज्यादा फायदेमंद होता है?
कई लोग मानते हैं कि सेंधा नमक में ज्यादा मिनरल्स होते हैं और यह ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ाता, जबकि काला नमक पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। लेकिन इन दावों को समझना जरूरी है। दरअसल, नमक का रंग या प्राकृतिक होना ही उसकी सेहत के लिए उपयोगिता तय नहीं करता। इसमें मौजूद सोडियम और आयोडीन की मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है।
1. सफेद नमक: रोजाना इस्तेमाल होने वाला आयोडीन युक्त नमक
सफेद नमक ज्यादातर भारतीय घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे समुद्री पानी या भूमिगत नमक के स्रोतों से प्राप्त करके प्रोसेस किया जाता है। बाजार में मिलने वाले आयोडीन युक्त नमक में शरीर के लिए जरूरी आयोडीन मिलाया जाता है।
आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज और थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी से घेंघा और थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, सफेद नमक का जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। इसमें मौजूद सोडियम की अधिकता से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए।
2. काला नमक: स्वाद और सुगंध के लिए लोकप्रिय
काला नमक अपने अलग स्वाद और खास गंध के लिए जाना जाता है। इसमें मौजूद सल्फर युक्त यौगिक इसकी विशिष्ट पहचान बनाते हैं। भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल चाट, सलाद, रायता, छाछ और नींबू पानी का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।
कई लोग काले नमक को गैस, अपच और पेट फूलने जैसी परेशानियों में भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन समस्याओं के इलाज में इसकी प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए काले नमक को पाचन संबंधी बीमारियों की दवा समझना सही नहीं है। इसे मुख्य रूप से स्वाद के लिए सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. सेंधा नमक: व्रत के भोजन में होता है इस्तेमाल
सेंधा नमक जमीन के अंदर मौजूद प्राकृतिक नमक के भंडारों से निकाला जाता है। यह सफेद, हल्के गुलाबी और अन्य हल्के रंगों में मिल सकता है। भारत में इसका इस्तेमाल खासतौर पर व्रत के दौरान बनाए जाने वाले भोजन में किया जाता है।
इसका मुख्य घटक सोडियम क्लोराइड होता है। इसमें पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ अन्य मिनरल्स भी बहुत कम मात्रा में मौजूद हो सकते हैं।
हालांकि, सेंधा नमक को लेकर यह दावा सही नहीं है कि इसमें मौजूद मिनरल्स की वजह से यह ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है या सामान्य नमक से काफी ज्यादा फायदेमंद है। इसमें भी सोडियम होता है और अधिक सेवन करने पर यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।
रोजाना खाने के लिए कौन-सा नमक सबसे अच्छा है?
तीनों नमक की तुलना करें तो रोजाना इस्तेमाल के लिए आयोडीन युक्त सफेद नमक एक अच्छा विकल्प है। इसकी वजह यह है कि शरीर को सोडियम के साथ आयोडीन की भी जरूरत होती है। सेंधा और काले नमक में आमतौर पर पर्याप्त आयोडीन नहीं होता, जब तक उन्हें अलग से आयोडीन युक्त न बनाया गया हो।
Office of Dietary Supplements+2
ध्यान रखें कि सेंधा नमक में 80 से ज्यादा मिनरल्स होने या इसके सेवन से बीपी नियंत्रित रहने जैसे दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसमें भी सोडियम होता है, इसलिए इसे अधिक मात्रा में खाना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
एक दिन में कितना नमक खाना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वयस्कों को एक दिन में कुल 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए। इसमें खाना पकाने, ऊपर से डालने और पैकेज्ड फूड से मिलने वाला नमक भी शामिल है।
World Health Organization+1
नमक का सेवन कम करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
खाने में जरूरत से ज्यादा नमक न डालें।
अचार, पापड़, चिप्स और नमकीन का सेवन सीमित रखें।
आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें।
सेंधा या काला नमक इस्तेमाल करने पर भी कुल नमक की मात्रा का ध्यान रखें।
हाई बीपी या किडनी की बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार नमक लें।
निष्कर्ष: रोजाना के भोजन के लिए आयोडीन युक्त सफेद नमक चुनना बेहतर है। सेंधा और काला नमक भी स्वाद के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें सफेद नमक से ज्यादा हेल्दी या बीपी कम करने वाला विकल्प समझना सही नहीं है। असली फायदा नमक की किस्म बदलने से ज्यादा उसकी मात्रा सीमित रखने में है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी या विशेष डाइट संबंधी जरूरत के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
