हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद शंकराचार्य मठ में फिर लौटा सामान्य माहौल, संत-बटुकों के चेहरे पर उल्लास

वाराणसी के विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद आश्रम में फिर से हर्ष और उल्लास का माहौल बन गया है।
कोर्ट का फैसला और शंकराचार्य का बयान
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई और फैसला रिजर्व कर लिया। शंकराचार्य के वकील पीएन मिश्रा ने अदालत में उनका पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें प्रस्तुत कीं।
शंकराचार्य ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि उनके मठ और संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने न्याय प्रणाली पर भरोसा जताया और कहा, “हमने अपनी दलील पूरी ईमानदारी से रखी, और अब कोर्ट ने प्राथमिक रूप से इसे मान्यता दी। यह साबित हुआ कि मुकदमा झूठा बनाया गया था।”
बटुकों और संतों की प्रतिक्रिया
मठ में लंबे समय से चिंता में डूबे संत और बटुक अब राहत महसूस कर रहे हैं। कई बटुकों ने कहा कि आरोप झूठे और मनगढ़ंत थे। उन्होंने कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताया और आश्रम में भरोसे और उत्साह का माहौल लौटने की खुशी जाहिर की।
मामला और शिकायत की पृष्ठभूमि
माघ मेले-2026 के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। आठ दिन बाद, आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, जिसमें माघ मेला और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से कथित यौन शोषण का आरोप लगाया गया। 13 फरवरी को बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई।
जांच और विवाद
पुलिस के मुताबिक, बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट भी जांच के तहत है। हालांकि, मठ में रह रहे बटुकों का दावा है कि उन्हें कभी शोषण का सामना नहीं करना पड़ा। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि आरोपों के पीछे राजनीतिक और साजिशपूर्ण मकसद हो सकता है।
बाहरी दावे
एक लेखिका ने शंकराचार्य के मठ में गुप्त कमरे, लग्जरी माहौल और स्विमिंग पूल के बारे में खुलासे किए। उनका दावा है कि मठ में कुछ विशेष लोग ही इन जगहों में प्रवेश कर सकते हैं।
