गोरखपुर विरासत गलियारा में जर्जर भवन बने खतरा, सड़क पर गिरा मकान का हिस्सा

गोरखपुर। नखास इलाके में विरासत गलियारा विकसित होने के बाद क्षेत्र की तस्वीर बदलती नजर आ रही है, लेकिन मुख्य सड़क के आसपास मौजूद कुछ पुराने मकान अब भी चिंता का कारण बने हुए हैं। कई भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में कमजोर हो चुके हैं। कहीं दीवारें झुक गई हैं तो कहीं छज्जे और प्लास्टर टूटने की स्थिति में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन भवनों के आसपास से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। ऐसे में जर्जर हिस्से के अचानक गिरने की आशंका बनी रहती है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक सभी खतरनाक मकानों की स्थिति का प्रभावी तरीके से निरीक्षण नहीं किया गया है।
कुछ दिन पहले सड़क पर गिरा था इमारत का हिस्सा
16 सितंबर को नखास चौक के पास एक पुरानी इमारत का पिलर अचानक टूटकर सड़क पर जा गिरा था। मलबे की चपेट में सड़क किनारे खड़ी एक बाइक भी आ गई, जिससे उसे काफी नुकसान हुआ।
घटना के समय वहां कोई राहगीर सीधे मलबे की चपेट में नहीं आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उसी समय कोई व्यक्ति वहां से गुजर रहा होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
नखास से रेती रोड के बीच कई पुराने भवन
स्थानीय नागरिकों के अनुसार नखास चौक से रेती रोड की तरफ जाने वाले मार्ग पर कुछ पुराने मकान अभी भी बेहद खराब स्थिति में हैं। लोगों ने कुछ भवनों की हालत को लेकर चिंता जताई है और प्रशासन से इनका निरीक्षण कराने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों का दावा है कि शिकायतें दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से कई मामलों में मौके पर जाकर स्थिति देखने या आवश्यक कार्रवाई करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
झुकी दीवारों से हादसे की आशंका
स्थानीय निवासी विशाल कुमार गुप्ता के मुताबिक मकान संख्या 140 की स्थिति काफी खराब है। उनका कहना है कि भवन की दीवारें बाहर की तरफ झुक गई हैं और समय-समय पर ईंट तथा प्लास्टर के टुकड़े गिरते रहते हैं।
उन्होंने बताया कि यह रास्ता काफी व्यस्त रहता है और यहां से महिलाएं, बच्चे और दूसरे राहगीर लगातार गुजरते हैं। ऐसे में जर्जर भवन का कोई हिस्सा गिरने पर हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
उनके अनुसार इस संबंध में नगर निगम और प्रशासन को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मौके का निरीक्षण कर भवन की स्थिति का आकलन किया जाए और यदि भवन खतरनाक पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
दुकानदारों में भी बनी हुई है चिंता
जर्जर भवन के आसपास दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें हर समय किसी हिस्से के गिरने का डर रहता है। साढ़े छह वाली गली की तरफ दुकान चलाने वाले कुछ लोगों ने भी भवन की स्थिति पर चिंता जताई है।
दुकानदार अख्तर आलम के मुताबिक उनकी दुकान के सामने पुराना और कमजोर मकान मौजूद है। उनका कहना है कि प्रशासन को भवन की स्थिति की जांच करके जरूरी कदम उठाना चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
छज्जा और पिलर गिरने से वाहन हुआ क्षतिग्रस्त
स्थानीय निवासी रूपेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हाल ही में चार मंजिला इमारत का छज्जा और पिलर नीचे गिर गया था। उस समय नीचे खड़ा वाहन मलबे की चपेट में आ गया और उसे काफी नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि घटना के वक्त वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, इसलिए बड़ा हादसा टल गया। उनका कहना है कि विरासत गलियारा बनने के बाद क्षेत्र का स्वरूप काफी बदल गया है, लेकिन सड़क के किनारे मौजूद कमजोर भवनों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
पांच महीने से मरम्मत का इंतजार
दुकानदार सत्यम खान ने बताया कि उनकी दुकान के पास स्थित जर्जर भवन की हालत लंबे समय से खराब है। उनके मुताबिक करीब पांच महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी भवन की मरम्मत नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि मकान मालिक इसकी मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं तो प्रशासन को कम से कम भवन की सुरक्षा स्थिति की जांच करनी चाहिए, ताकि आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को खतरे से बचाया जा सके।
मकान मालिक ने बताई हिस्सेदारी की वजह
मामले को लेकर मकान में रह रहे संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि भवन में कई लोगों की हिस्सेदारी है। उनके अनुसार कुछ हिस्सेदार अपना हिस्सा बेचकर अलग हो चुके हैं और नए खरीदारों की ओर से मकान का एक हिस्सा तोड़ने का काम शुरू किया गया था।
उनका कहना है कि इसी वजह से भवन की स्थिति और कमजोर हो गई। संदीप कुमार गुप्ता के मुताबिक फिलहाल उनके पास भवन की पूरी मरम्मत कराने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, लेकिन जर्जर हिस्से को सुरक्षित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन से निरीक्षण की मांग
विरासत गलियारा के विकास के बाद नखास और रेती इलाके में सड़क तथा आसपास के क्षेत्र का स्वरूप बदल रहा है। इसके बीच पुराने और कमजोर मकानों की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों की चिंता बनी हुई है।
लोगों की मांग है कि मुख्य मार्ग और आसपास के इलाकों में मौजूद ऐसे सभी पुराने भवनों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जिन इमारतों की स्थिति खतरनाक पाई जाए, उनके संबंध में नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।
