चोरी का आरोपी 9 महीने तक अदालत नहीं आया, कोर्ट ने गैरहाजिरी में सुनाया फैसला; 7 साल जेल

झांसी में चोरी के एक मामले में अदालत ने लंबे समय से सुनवाई से गैरहाजिर चल रहे आरोपी के खिलाफ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी संतोष ढीमर को चोरी का दोषी मानते हुए 7 साल के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है। आरोपी करीब नौ महीने से अदालत में होने वाली तारीखों पर उपस्थित नहीं हो रहा था।

यह फैसला गुरुवार को न्यायालय संख्या-1 के अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य चतुर्वेदी की अदालत में सुनाया गया। मामले में बताया गया कि नए कानूनी प्रावधानों के तहत यदि कोई आरोपी सुनवाई के दौरान अदालत से लगातार अनुपस्थित रहता है, तो निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसकी गैरहाजिरी में भी मुकदमे का फैसला किया जा सकता है। झांसी में इस प्रावधान के तहत यह पहला मामला होने की बात सामने आई है।

मेडिकल स्टोर में रात के समय हुई थी चोरी

मामला वीरांगना नगर के राम एनक्लेव निवासी आलोक कनकने के मेडिकल स्टोर से जुड़ा है। उनकी दुकान बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के सामने स्थित है। 15 सितंबर 2024 की सुबह जब वह मेडिकल स्टोर पहुंचे तो अंदर का सामान अस्त-व्यस्त मिला।

जांच करने पर दुकान से चांदी की दो मूर्तियां, दो मोबाइल फोन, करीब 7,500 रुपये नकद और कुछ दवाइयां गायब मिलीं। इसके बाद दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई।

फुटेज में दिखाई दिया कि 14 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे एक व्यक्ति दीवार पार करके परिसर में दाखिल हुआ। इसके बाद उसने ग्रिल को काटकर मेडिकल स्टोर के अंदर प्रवेश किया। करीब एक घंटे तक दुकान के अंदर रहने के बाद आरोपी सामान लेकर वहां से निकल गया।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का सामान बरामद किया

घटना की जांच के दौरान पुलिस ने 23 सितंबर 2024 को बबीना की हरिजन कॉलोनी निवासी संतोष ढीमर को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और उसकी निशानदेही के आधार पर चोरी का सामान बरामद किया गया, जिसमें चांदी की मूर्ति भी शामिल थी।

मेडिकल स्टोर संचालक ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आरोपी की पहचान भी की थी। इसके बाद मामले में पुलिस की ओर से आवश्यक कार्रवाई पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया गया।

जमानत के बाद कुछ समय तक अदालत में आता रहा आरोपी

मामले में जमानत मिलने के बाद संतोष ढीमर नियमित रूप से अदालत में पेश होता रहा। वह 3 दिसंबर 2025 तक कोर्ट की तारीखों पर उपस्थित हुआ, लेकिन इसके बाद उसने अदालत में आना बंद कर दिया।

6 दिसंबर 2025 के बाद से वह लगातार सुनवाई से गैरहाजिर रहा। लंबे समय तक उसकी अनुपस्थिति के बावजूद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती रही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज हैं कई मामले

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार संतोष ढीमर के खिलाफ चोरी के अलावा आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम से संबंधित मामले भी दर्ज हैं। कुल मिलाकर उसके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर संतोष ढीमर को चोरी का दोषी माना और उसे 7 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह मामला इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि आरोपी के लंबे समय तक अदालत में उपस्थित नहीं होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी गैरहाजिरी में मुकदमे का निर्णय किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *