निवेश के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला, नोएडा में 3 लोगों से 56 लाख ऐंठे

नोएडा में ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधियों ने तीन लोगों को अपने जाल में फंसाकर कुल 56 लाख 40 हजार रुपये से अधिक की रकम ठग ली। पीड़ितों में एक 64 वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल हैं।

ठगी का शिकार हुए लोगों ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की थी। शिकायतों की जांच के बाद अब साइबर क्राइम थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और रकम के ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।

बुजुर्ग से 18.61 लाख रुपये की ठगी

पहला मामला सेक्टर-52 का है। यहां रहने वाले 64 वर्षीय सुभाष चंद्र यादव ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी की शिकायत की है। उनके अनुसार, साइबर अपराधियों ने अलग-अलग प्रक्रिया के जरिए उनसे कुल 18 लाख 61 हजार 218 रुपये की रकम ट्रांसफर करा ली।

सुभाष चंद्र ने इस संबंध में 19 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में ऑनलाइन धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद मामला साइबर क्राइम थाने में दर्ज किया गया।

सेक्टर-143 के युवक से 14 लाख ठगे

दूसरा मामला सेक्टर-143 से सामने आया है। यहां रहने वाले हर्षित को कथित तौर पर निवेश के नाम पर साइबर अपराधियों ने निशाना बनाया। पीड़ित से करीब 14 लाख रुपये की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कराई गई।

हर्षित ने 10 नवंबर 2025 को साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

तीसरे व्यक्ति से 23.79 लाख की धोखाधड़ी

तीसरी शिकायत में 23 लाख 79 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता चंदन मंडल ने बताया कि निवेश के नाम पर उसके साथ साइबर धोखाधड़ी की गई और बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करा ली गई।

चंदन मंडल ने 29 सितंबर 2025 को साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में भी अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की जांच

तीनों मामलों में पुलिस का कहना है कि ठगी निवेश के नाम पर की गई। अब जांच टीम उन बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटा रही है, जिनके जरिए पीड़ितों से रकम ट्रांसफर कराई गई।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसे किन माध्यमों से आगे ट्रांसफर किया गया। साथ ही आरोपियों की पहचान और पूरे साइबर नेटवर्क का पता लगाने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

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