यूपी की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख ‘रहस्यमयी वोटर’ जोड़ने का दावा भ्रामक, CEO ने बताई पूरी सच्चाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR-2026 के दौरान 16.18 लाख ‘रहस्यमयी वोटर’ जोड़ने के दावे को प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तरह की खबरों को उन्होंने भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में SIR-2026 की पूरी प्रक्रिया निर्धारित कानून, नियमों और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत कराई गई। उनका कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
16.18 लाख फॉर्म-6 कैसे जमा हुए?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच SIR के गणना चरण में बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया था। इसी दौरान करीब 16.18 लाख फॉर्म-6 भी एकत्र किए गए।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नया नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, SIR शुरू होने की तारीख यानी 27 अक्टूबर 2025 को जिन पात्र नागरिकों के नाम मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे, उनके लिए गणना प्रपत्र पहले से प्रिंट नहीं हो सके थे।
ऐसे नागरिकों को बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर फॉर्म-6 उपलब्ध कराए और उनसे आवेदन प्राप्त किए। इसलिए इन फॉर्म की संख्या को मतदाता सूची में अचानक जोड़े गए ‘रहस्यमयी वोटरों’ के तौर पर पेश करना सही नहीं है।
फिर इन नामों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
16.18 लाख फॉर्म-6 को लेकर एक सवाल यह भी उठाया गया कि इनके नाम 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में क्यों नजर नहीं आए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इसके पीछे निर्धारित चुनावी प्रक्रिया है। 6 जनवरी 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद दावा और आपत्ति की अवधि शुरू हुई थी। इस अवधि के दौरान प्राप्त फॉर्म-6 के आधार पर जिन आवेदनों को प्रक्रिया में शामिल किया गया, उनकी जानकारी नियमों के मुताबिक संबंधित सूची में प्रदर्शित की गई।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले प्राप्त कुछ आवेदन उस समय तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाते हैं। इसके बाद दावा और आपत्ति की अवधि में ऐसे मामलों की जांच और निस्तारण किया जाता है।
हर साल की पुनरीक्षण प्रक्रिया में भी होता है ऐसा
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी समझाया कि यह केवल SIR-2026 से जुड़ी स्थिति नहीं है। सामान्य मतदाता सूची के वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान भी एक निर्धारित समय पर निर्वाचक नामावली को अपडेट के लिए फ्रीज किया जाता है।
इस वजह से प्रारूप सूची के प्रकाशन से पहले प्राप्त कुछ फॉर्म-6 तत्काल प्रकाशित सूची में शामिल नहीं हो पाते। बाद में दावा और आपत्ति की अवधि में इन आवेदनों का निस्तारण किया जाता है और अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।
फॉर्म-6 स्वीकार करने का कोई तय प्रतिशत नहीं
सोशल मीडिया पर फॉर्म-6 के स्वीकृत होने के प्रतिशत को लेकर किए गए दावों पर भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्टीकरण दिया है।
उनके मुताबिक, फॉर्म-6 स्वीकार करने के लिए कोई ऐसा निर्धारित प्रतिशत या गणितीय फॉर्मूला नहीं है, जिसके आधार पर आवेदन मंजूर किए जाएं। प्रत्येक आवेदन की जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है और पात्र पाए जाने पर ही नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाता है।
इसलिए फॉर्म-6 के स्वीकृति प्रतिशत को लेकर लगाए जा रहे अनुमान को उन्होंने बिना ठोस आधार की बात बताया।
राजनीतिक दलों की भागीदारी के बीच पूरी हुई प्रक्रिया
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में SIR-2026 की प्रक्रिया कानून के मुताबिक और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भी भागीदारी रही।
उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की ओर से SIR-2026 को लेकर ऐसे आरोप नहीं लगाए गए हैं, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों में दावा किया जा रहा है।
इसलिए 16.18 लाख फॉर्म-6 को सीधे ‘फर्जी’ या ‘रहस्यमयी वोटरों’ से जोड़ना सही नहीं है। ये आवेदन उन पात्र नागरिकों से संबंधित थे, जिनके नाम मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे और जिनके लिए पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 एकत्र किए गए थे।
