CJI सूर्यकांत को लेकर कांग्रेस की पोस्ट पर भड़के किरेन रिजिजू, पार्टी पर किया हमला

केरलम कांग्रेस की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को लेकर सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब देश की न्यायपालिका को निशाना बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बयान के बाद संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और राजनीतिक दलों की बयानबाजी को लेकर बहस तेज हो गई है।
किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह पहले भी कांग्रेस को लेकर ऐसी आशंका जता चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना चाहती है। रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत विरोधी सोच रखने वाले समूह एकजुट हो रहे हैं और इसके जवाब में देशभक्त भारतीय भी एक साथ आएंगे।
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस ने हटाई पोस्ट
मुख्य न्यायाधीश को लेकर की गई टिप्पणी पर आलोचना बढ़ने के बाद केरलम कांग्रेस ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी। पार्टी की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि पोस्ट साझा करने वाले कार्यकर्ता के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे पार्टी से बाहर कर दिया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि सार्वजनिक मंचों पर न्यायपालिका के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों को लेकर किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। विवादित पोस्ट हटाने और संबंधित कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई आपत्ति
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी नाराजगी जताई। एसोसिएशन ने न्यायपालिका के प्रति इस तरह की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसे बयान न्यायिक संस्था की प्रतिष्ठा और गरिमा को प्रभावित कर सकते हैं।
एसोसिएशन ने न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और सर्वोच्च न्यायालय की मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। इस विवाद ने एक बार फिर न्यायपालिका के प्रति सार्वजनिक संवाद में संयम बरतने और संस्थागत सम्मान बनाए रखने के सवाल को चर्चा में ला दिया है।
क्या कहा गया था केरलम कांग्रेस की पोस्ट में?
विवाद की शुरुआत केरलम कांग्रेस के उस सोशल मीडिया संदेश से हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की गई थी। पोस्ट में कहा गया था कि यदि वह कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए और उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
इस टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई गई और मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। इसके बाद पोस्ट हटाए जाने तथा संबंधित कार्यकर्ता पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च से जुड़ा है मामला
यह विवाद ऐसे समय सामने आया, जब इंडिया गठबंधन के कई विपक्षी नेता दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने के मुद्दे पर चर्चा में थे। इस राजनीतिक घटनाक्रम में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्ष के अन्य नेताओं की भूमिका भी सुर्खियों में रही।
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी के नाम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने का भी उल्लेख किया गया। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी से मुलाकात करने के बजाय उन्हें उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका दाखिल करने की सलाह दी थी।
न्यायपालिका की गरिमा पर राजनीतिक बहस तेज
केरलम कांग्रेस की पोस्ट, किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया और बार एसोसिएशन की आपत्ति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। एक ओर कांग्रेस की पोस्ट को लेकर आलोचना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इस घटनाक्रम ने राजनीतिक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सार्वजनिक आचरण पर बहस को भी आगे बढ़ाया है।
फिलहाल, विवाद के केंद्र में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को लेकर की गई टिप्पणी और उस पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करते समय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत मर्यादा का सम्मान किस तरह बनाए रखा जाना चाहिए।
Source-BNBA
