KESCO के नाम पर हो रही फर्जी कॉल, बिजली बिल के लिए किसी अनजान ऐप को डाउनलोड न करें

कानपुर में बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर साइबर ठगी के प्रयास सामने आए हैं। स्मार्ट मीटर व्यवस्था में बदलाव के बीच कुछ लोगों को बिजली विभाग के नाम पर फर्जी कॉल की जा रही हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए केस्को ने उपभोक्ताओं से सतर्क रहने और किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड न करने की सलाह दी है।
फर्जी कॉल कर मांगी जा रही जानकारी
बिजली विभाग के अनुसार कुछ उपभोक्ताओं को फोन कर पहले यह पूछा जा रहा है कि उनका मीटर प्रीपेड से पोस्टपेड किया गया है या नहीं। इसके बाद बिल भुगतान या मीटर अपडेट का हवाला देकर उन्हें एक नया मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। इसके जरिए साइबर ठगी की कोशिश की जा सकती है।
विभाग ने जारी की चेतावनी
केस्को प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को इस तरह की कोई कॉल नहीं की जाती और न ही किसी नए ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यदि किसी उपभोक्ता को इस प्रकार का फोन आता है तो उस पर भरोसा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
साइबर ठगी के मामलों पर रखी जा रही नजर
बिजली विभाग के अनुसार हाल के दिनों में इस तरह की शिकायतें बढ़ी हैं। विभाग को अपने नाम से फर्जी कॉल किए जाने की सूचनाएं मिली हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। हेल्पलाइन पर मिलने वाली शिकायतों को भी संबंधित एजेंसियों तक भेजा जा रहा है ताकि साइबर ठगी पर रोक लगाई जा सके।
इन उपभोक्ताओं को बनाया जा रहा निशाना
जानकारी के अनुसार ठग विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं को निशाना बना रहे हैं जिनके बिजली मीटर प्रीपेड से पोस्टपेड किए गए हैं। उन्हें भविष्य में बिल जमा करने की प्रक्रिया समझाने या खाते को सक्रिय करने के नाम पर फोन किया जा रहा है।
बिजली बिल जमा करने के अधिकृत तरीके
बिजली विभाग ने बताया कि ऑनलाइन बिल भुगतान केवल आधिकारिक माध्यमों से ही करना चाहिए। उपभोक्ता विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या यूपीपीसीएल के अधिकृत स्मार्ट ऐप के जरिए भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा शहर में कई अधिकृत कैश काउंटर भी संचालित हैं, जहां बिजली बिल जमा किया जा सकता है। बिल पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके भी सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
यदि कोई व्यक्ति बिजली विभाग का कर्मचारी बनकर फोन करे, नया ऐप डाउनलोड करने को कहे या बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन अथवा अन्य गोपनीय जानकारी मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसे मामलों की सूचना संबंधित हेल्पलाइन या साइबर अपराध पोर्टल पर देकर समय रहते शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके।
