SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अभय ओका की दोटूक, चुनाव आयोग नागरिकता पर फैसला नहीं कर सकता

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देश में राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय एस. ओका ने SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में यह तय करना शामिल नहीं है कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं। उन्होंने शीर्ष अदालत से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की बात भी कही।
पूर्व जस्टिस ओका की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद चल रहा है। विपक्ष के कई नेता इस प्रक्रिया पर आपत्ति जता रहे हैं। उनकी मांग है कि SIR को रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। हालांकि, SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया से संबंधित दावों पर अंतिम स्थिति न्यायिक सुनवाई और संबंधित आदेशों से स्पष्ट होगी।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिकाएं
SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाओं में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तरीके और इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों को चुनौती दी गई है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले में शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। उनकी ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष अनुरोध किया कि उनकी याचिका को SIR से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस मामले में अदालत के सामने प्रक्रिया की वैधता, मतदाताओं के अधिकार और चुनाव आयोग की शक्तियों से जुड़े प्रश्न उठाए गए हैं।
15 अक्टूबर को सुनवाई की संभावना
SIR से संबंधित याचिकाओं पर 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना जताई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिकाओं की संभावित सुनवाई की तारीख अदालत की वेबसाइट पर 15 अक्टूबर दिखाई गई थी।
बताया गया कि संबंधित याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल हुई और 13 अक्टूबर को रजिस्टर की गई थी। इसमें चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के तौर-तरीकों, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था को चुनौती दी गई है।
इन याचिकाओं के जरिए अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किस तरह किया जाना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो सकती है।
SIR को लेकर विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिविजन है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है और सूची को अद्यतन करने की कार्रवाई होती है।
इस प्रक्रिया को लेकर विवाद मुख्य रूप से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका, दस्तावेजों की मांग, सत्यापन के तरीकों और चुनाव आयोग के अधिकारों से संबंधित है। विपक्षी दल इन मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मामले की संवैधानिक और कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित नियमों तथा न्यायालय के फैसलों के आधार पर होगा।
पूर्व न्यायाधीश अभय एस. ओका की टिप्पणी ने इस बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और आने वाले आदेशों पर नजर रहेगी, जिनसे SIR की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए कानूनी सवालों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
