अफगानिस्तान में NATO की सैन्य गतिविधियों पर रूस ने जताई आपत्ति, दी कड़ी चेतावनी

रूस ने अफगानिस्तान और उसके आसपास के इलाकों में NATO से जुड़े सैन्य ढांचे की संभावित तैनाती को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि किसी भी बहाने से अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में NATO का सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना मॉस्को को स्वीकार नहीं है। रूस का मानना है कि ऐसी सैन्य मौजूदगी क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
अफगानिस्तान पर आयोजित 8वें मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशंस में बोलते हुए लावरोव ने पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में लंबे समय तक मौजूद रहने के बावजूद NATO अपनी सैन्य ताकत के बल पर वहां स्थायी समाधान हासिल नहीं कर सका।
अफगान सरकार को लेकर लावरोव का बड़ा दावा
लावरोव ने तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार के कामकाज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश के अधिकांश हिस्सों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है और सत्ता संभालने के बाद से शासन व्यवस्था को चलाने में वह सफल रही है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को पश्चिमी सैन्य कब्जे से बाहर आए पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। रूस का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अफगानिस्तान की वास्तविक राजनीतिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
ISIS और दूसरे आतंकी संगठनों के खिलाफ अभियान का दावा
रूसी विदेश मंत्री ने अफगान सुरक्षा बलों की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, अफगान सुरक्षा एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं।
लावरोव ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया है और कई गंभीर हमलों को नाकाम किया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की आतंकवाद विरोधी क्षमता को मजबूत करना सभी देशों के हित में है।
उन्होंने इस दिशा में लॉजिस्टिक सहायता, विशेषज्ञ मदद और सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
अफीम उत्पादन में 90 फीसदी गिरावट का दावा
अफगानिस्तान में ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर भी लावरोव ने सकारात्मक आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि अफगान सरकार द्वारा नशीले पदार्थों की तस्करी और उत्पादन पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदमों का असर दिखाई दे रहा है।
लावरोव के मुताबिक, 2022 के बाद से अफगानिस्तान में अफीम के उत्पादन में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने इसे ड्रग्स के खिलाफ अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया।
आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी का दावा
लावरोव ने अफगान अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों और अन्य आर्थिक चुनौतियों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां जारी हैं।
उनके अनुसार, अफगानिस्तान में करीब 170 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां शुरू हो चुकी हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष देश का विदेशी व्यापार लगभग 14 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अफगानिस्तान की मानवीय स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और वहां आम लोगों के सामने कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।
NATO की सैन्य मौजूदगी को लेकर रूस की चेतावनी
रूस का मुख्य जोर इस बात पर है कि अफगानिस्तान और उसके आसपास NATO के सैन्य ढांचे की वापसी या नई तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। मॉस्को ने साफ संकेत दिया है कि वह ऐसी किसी भी व्यवस्था का विरोध करेगा, जिससे मध्य एशिया और अफगानिस्तान के आसपास सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका हो।
