सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर नवीन पटनायक का सवाल, रिहाई की मांग करते हुए कही ये बात

भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की मांग की है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को उन्होंने दोनों की न्यायिक हिरासत की तत्काल समीक्षा करने और उन्हें जल्द रिहा करने की अपील की। पटनायक ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में इतनी लंबी हिरासत उचित नहीं होनी चाहिए, भले ही यह गतिविधि किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में हुई हो।

नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए संदेश की शुरुआत ‘जय हिंद’ से की। उन्होंने इस मामले को कानून के शासन और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों को समय रहते उचित कदम उठाने चाहिए।

कानून और संवैधानिक अधिकारों पर भरोसा बनाए रखना जरूरी

नवीन पटनायक ने अपने बयान में न्यायपालिका और कार्यपालिका से मामले की गंभीरता को समझते हुए हस्तक्षेप करने की अपील की। उनका कहना है कि सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत की जल्द समीक्षा होनी चाहिए, ताकि देश के युवाओं का कानून और संविधान में विश्वास बना रहे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने की घटना को लंबे समय तक हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, यह मामला प्रतिबंधित क्षेत्र में झंडा फहराने से जुड़ा है, इसलिए इसके कानूनी पहलुओं पर संबंधित अधिकारियों और अदालतों को विचार करना होगा।

पटनायक की इस मांग के बाद दोनों नेताओं की हिरासत को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। उनके बयान का मुख्य केंद्र यह है कि किसी मामले में कानूनी कार्रवाई करते समय नागरिकों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

के. अन्नामलई ने भी CJP के पक्ष में उठाए सवाल

इस मामले में तमिलनाडु के पूर्व भाजपा अध्यक्ष और वी द लीडर्स के संस्थापक के. अन्नामलई ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए।

अन्नामलई ने स्पष्ट किया कि CJP के विरोध प्रदर्शन करने के तरीकों और उसकी कुछ गतिविधियों से वह सहमत नहीं हो सकते। हालांकि, उनके मुताबिक, संगठन की ओर से उठाए गए सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी संगठन के तरीकों से असहमति होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाए। उनके अनुसार, सरकार को इन सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

लंबी हिरासत से बढ़ सकती है राजनीतिक बहस

के. अन्नामलई ने गिरफ्तारी और लंबे समय तक जेल में रखे जाने को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामूली उल्लंघन के मामले में लोगों को गिरफ्तार करके लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है, तो इससे संबंधित संगठन को राजनीतिक रूप से और समर्थन मिल सकता है।

उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया और मामले में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।

अन्नामलई के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी संगठन की विचारधारा या विरोध के तरीकों से असहमति के बावजूद उसके सदस्यों के साथ की जाने वाली कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर बढ़ा ध्यान

नवीन पटनायक और के. अन्नामलई की प्रतिक्रियाओं के बाद सौरव दास तथा आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में आ गया है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग दृष्टिकोण से हिरासत की अवधि और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

पटनायक ने संवैधानिक अधिकारों और कानून के शासन में युवाओं का विश्वास बनाए रखने पर जोर दिया, जबकि अन्नामलई ने सरकार से CJP की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देने की मांग की।

फिलहाल, दोनों की रिहाई को लेकर नवीन पटनायक ने तत्काल समीक्षा की अपील की है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और संबंधित कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

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