35 करोड़ की कथित ठगी का मामला पहुंचा पुलिस तक, मेगा लेदर क्लस्टर के 25 और कारोबारी सामने आए

कानपुर के रमईपुर स्थित मेगा लेदर क्लस्टर में जमीन दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। एक कारोबारी की शिकायत पर पहले ही मुकदमा दर्ज हो चुका है। अब करीब 25 अन्य लेदर कारोबारियों ने भी पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर अपने साथ कथित तौर पर हुई ठगी की शिकायत की है।

कारोबारियों का आरोप है कि क्लस्टर में जमीन दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन न तो उन्हें जमीन मिली और न ही जमा की गई रकम वापस की गई। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मामले में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है।

पीड़ित कारोबारियों का दावा है कि इस परियोजना के नाम पर करीब 329 लोगों से लगभग 35 करोड़ रुपये लिए गए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

एडीसीपी पूर्वी से मिले 25 कारोबारी

बुधवार को कई लेदर कारोबारियों ने एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह से मुलाकात की। शिकायत करने पहुंचे कारोबारियों ने जमीन के लिए किए गए भुगतान से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे।

कारोबारियों की ओर से हस्ताक्षरयुक्त शिकायत भी दी गई है। इसमें आरोप लगाया गया कि रकम लेने के बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। पीड़ितों ने मांग की कि प्रत्येक शिकायत की अलग से जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ताओं ने मेगा लेदर क्लस्टर के कुछ निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों पर भी आरोप लगाए हैं। पुलिस अब शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

36.50 लाख रुपये देने का दावा

चेन्नई के कारोबारी सरफराज अख्तर ने आरोप लगाया कि उन्होंने रमईपुर स्थित परियोजना में टेनरी स्थापित करने के लिए करीब 500 वर्गमीटर जमीन के लिए आवेदन किया था।

उनके अनुसार, जमीन दिलाने के नाम पर उनसे कुल 36.50 लाख रुपये लिए गए। रकम अलग-अलग चरणों में जमा कराई गई थी। उनका दावा है कि शुरुआती भुगतान के बाद आगे भी उनसे बड़ी रकम ली गई, लेकिन परियोजना में रुकावट आने के बाद उन्हें न जमीन मिली और न पैसा वापस किया गया।

सरफराज के मुताबिक, उन्होंने इस मामले को लेकर शिकायत की थी। जांच के बाद पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई हुई।

परियोजना शुरू होने के बाद सामने आईं समस्याएं

कारोबारियों के मुताबिक रमईपुर में मेगा लेदर क्लस्टर विकसित करने की योजना कई साल पहले शुरू हुई थी। इसमें बड़ी संख्या में कारोबारियों ने टेनरी और लेदर से जुड़ी इकाइयां स्थापित करने के लिए जमीन के लिए आवेदन किया था।

आवेदकों ने परियोजना में जमीन हासिल करने की उम्मीद में अलग-अलग समय पर रकम जमा की। लेकिन परियोजना को लेकर विवाद और अन्य अड़चनों के कारण कई आवेदकों को कथित तौर पर जमीन नहीं मिल सकी।

शेयर बांटने को लेकर भी उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं ने जमीन के अलावा क्लस्टर में शेयरों के आवंटन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक कारोबारी ने दावा किया कि परियोजना से जुड़े अन्य आवेदकों के हिस्से के शेयर कुछ चुनिंदा लोगों के बीच बांट दिए गए। शिकायत में कई लोगों को अलग-अलग संख्या में शेयर दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि क्लस्टर में जमीन के लिए 300 से अधिक कारोबारियों ने आवेदन किया था। ऐसे में उनका तर्क है कि परियोजना में जिन लोगों ने निवेश किया था, उन्हें उनके निवेश के अनुपात में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

मामले में अब शिकायतों की संख्या बढ़ने के बाद पुलिस के सामने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की चुनौती है। पुलिस भुगतान से जुड़े दस्तावेज, जमीन आवंटन के रिकॉर्ड, परियोजना से संबंधित कागजात और शेयर आवंटन की जानकारी की जांच कर सकती है।

फिलहाल कारोबारियों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी रकम का लेनदेन हुआ, जमीन आवंटन में क्या स्थिति रही और शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

मामले में नए शिकायतकर्ताओं के सामने आने से मेगा लेदर क्लस्टर से जुड़े विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है।

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