वाराणसी में बाढ़ की आहट तेज, गंगा का बढ़ता जलस्तर किसानों के लिए बना परेशानी

वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर तटवर्ती और निचले इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी लगातार ऊपर आ रहा है और कई घाटों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। गंगा का जलस्तर 69.04 मीटर तक पहुंच गया है और इसमें करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब सवा मीटर नीचे है। पानी बढ़ने के कारण घाटों और आसपास के इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
कई घाटों पर बढ़ा पानी
गंगा का पानी रविदास घाट से लेकर नमो घाट तक फैलता नजर आ रहा है। अस्सी घाट पर होने वाला ‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम का मंच पानी में डूब चुका है। वहीं दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी के प्रवेश हिस्से तक पानी पहुंच गया है।
घाटों पर लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए राजस्व विभाग के कर्मचारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें भी सक्रिय हैं और लोगों से नदी में सावधानी बरतने की अपील कर रही हैं।
वरुणा किनारे के इलाकों में भी पहुंचा पानी
गंगा के साथ वरुणा नदी के आसपास बसे निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ का प्रभाव दिखाई देने लगा है। सलारपुर नाला, चमेलिया बस्ती और डिपो कॉलोनी के निचले हिस्सों में कई घरों तक पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
पानी बढ़ने की आशंका के चलते कुछ परिवार ऊंचे इलाकों में किराए के मकान में चले गए हैं। कुछ लोगों ने घर का जरूरी सामान ऊपर की मंजिल पर सुरक्षित रख दिया है और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
छोटी मस्जिद पुरानापुल इलाके में नाले के रास्ते पानी घरों की चौखट तक पहुंच गया है। करीब आधा दर्जन मकान पानी से घिरे बताए जा रहे हैं। हालांकि राहत शिविर के तौर पर तैयार किए गए प्राथमिक विद्यालय सलारपुर में दोपहर तक किसी परिवार के पहुंचने की सूचना नहीं थी।
चिरईगांव के खेतों में घुसा बाढ़ का पानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वाराणसी के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में भी दिखने लगा है। चिरईगांव ब्लॉक के ढाब इलाके में निचले खेतों में पानी भरने से सब्जियों की फसल प्रभावित होने लगी है।
मोकलपुर क्षेत्र के किसानों की दो बीघे से अधिक जमीन में उगाई गई नेनुआ, करैला और कुनरू की फसल पानी में डूब गई है। वहीं रामचंदीपुर नखवा इलाके में किसान परसू यादव द्वारा तैयार की गई हरी मिर्च की नर्सरी भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है।
किसानों को आशंका है कि अगर खेतों से पानी जल्द नहीं निकला तो सब्जियों की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है। इससे पहले से ही खेती पर निर्भर परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना है।
बाढ़ के साथ कटान का खतरा भी बढ़ा
नदी का पानी बढ़ने के साथ कई तटवर्ती इलाकों में कटान की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। कुछ स्थानों पर कृषि भूमि का हिस्सा धीरे-धीरे नदी में समा रहा है। ऐसे में किसानों के सामने फसल बचाने के साथ अपनी जमीन को सुरक्षित रखने की भी चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। बीडीओ और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिया सैनी ने शुक्रवार को क्षेत्र की बाढ़ चौकियों का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव पर भी जोर दिया गया है, ताकि बाढ़ के बाद मच्छरों और संक्रमण से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सके।
27 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना कम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वाराणसी में फिलहाल बहुत तेज बारिश की संभावना कम है। मानसून द्रोणिका की स्थिति में बदलाव के कारण 27 अगस्त तक भारी बारिश की उम्मीद नहीं जताई गई है। हालांकि बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में रुक-रुककर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
शनिवार सुबह वाराणसी का तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग 6 किलोमीटर प्रति घंटा और आर्द्रता करीब 70 प्रतिशत रही।
फिलहाल गंगा के जलस्तर में जारी बढ़ोतरी प्रशासन और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। आने वाले दिनों में नदी का स्तर किस दिशा में जाता है, इस पर लगातार नजर रखी जा रही है।
